Rahat Indori Shayari In Hindi : Best By Rahat Indori

Hi There,

Today we have an amazing collection of  Rahat Indori Shayari In Hindi. As we know that Rahat Indori is a famous Indian, Urdu, poet, Shayar, and singer. 

          His real name is Rahat Kusheri. He born on 1st January1950 and he passed away on 11 August 2020. His residence from the Indoor that's why he used Indori after his name.

So today we are sharing his famous Shayari. I'm sure you gonna love this. 

Let check it out.


             

Rahat Indori Shayari In Hindi




rahat indori shayari


आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो,
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो,
एक ही नदी के हैं ये दो किनारे दोस्तो,
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो। 

सरहदों पर बहुत  तनाव है क्या,
कुछ पता तो करो चुनाव है क्या। 

हर एक हर्फ का अन्दाज बदल रक्खा है,
आज से हमने तेरा नाम ग़ज़ल रक्खा है,
मैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दिया,
मेरे कमरे में भी एक ताजमहल रक्खा है। 

तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो,
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो। 

Loo Bhi Chalti Thi Toh Baad-e-Shaba Kehte The,
Paanv Failaye Andheron Ko Diya Kehte The,
Unka Anjaam Tujhe Yaad Nahi Hai Shayad,
Aur Bhi Log The Jo Khud Ko Khuda Kehte The.

जागने की भी, जगाने की भी, आदत हो जाए काश तुझको,
 किसी शायर से मोहब्बत हो जाए दूर हम कितने दिन से हैं, 
ये कभी गौर किया फिर न कहना जो अमानत में खयानत हो जाए। 

Log Har Mod Par Ruk Ruk Ke Sambhalte Kyu Hai, 
Itna Darte Hai To Fir Ghar Se Nikalte Kyu Hai.

हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे,
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते। 

Wo aur honge jo khanjar chhupa ke laate hain,
Hum apne saath fati aastin lae hain,
Humari baat ki gahraai khaak samjhenge,
Jo parvaton ke lie khurdbeen lae hain. 


rahat indori shayri


तू इस तरह से मेरी ज़िन्दगी में शामिल है।
जहां भी जाऊ लगता है तेरी ही महफ़िल है। 

जंग है तो जंग का मंज़र भी होना चाहिए,
सिर्फ नेज़े हाथ में हैं सर भी होना चाहिए। 

हाथ ख़ाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,
जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते,
अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,
उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते जाते। 

ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई मांगे,
जो हो परदेस में वो किससे रज़ाई मांगे। 

Roj Taaron Ki Numaaish Mein Khalal Padta Hai,
Chand Pagal Hai Andhere Mein Nikal Padta Hai,
Roj Patthar Ki Himayat Mein Ghazal Likhte Hain,
Roj Sheeshon Se Koi Kaam Nikal Padta Hai.

अब हम मकान में ताला लगाने वाले हैं पता चला हैं की मेहमान आने वाले हैं। 

एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो,
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो। 

रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं,
चाँद पागल हैं अन्धेरें में निकल पड़ता है,
उसकी याद आई हैं सांसों, जरा धीरे चलो,
धडकनों से भी इबादत में खलल पड़ता हैं। 

अजनबी ख़्वाहिशें सीने में दबा भी न सकूँ,
ऐसे ज़िद्दी हैं परिंदे कि उड़ा भी न सकूँ,
फूँक डालूँगा किसी रोज़ मैं दिल की दुनिया,
ये तेरा ख़त तो नहीं है कि जला भी न सकूँ।


rahat indori shayari in hindi


अपने हाकिम की फकीरी पे तरस आता है,
जो गरीबों से पसीने की कमाई मांगे। 


Maikhane band kare lakh zamane wale,
Shehar mein kam nahin aankhon se pilane wale. 

घर के बाहर ढूँढता रहता हूँ दुनिया घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है। 

शहर क्या देखें कि हर मंज़र में जाले पड़ गए,
ऐसी गर्मी है कि पीले फूल काले पड़ गए। 

जवानिओं में जवानी को धुल करते हैं,
जो लोग भूल नहीं करते, भूल करते हैं,
अगर अनारकली हैं सबब बगावत का,
सलीम हम तेरी शर्ते कबूल करते हैं। 

तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो,
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो। 

जुबां तो खोल, नजर तो मिला, जवाब तो दे,
मैं कितनी बार लुटा हूँ, हिसाब तो दे। 

tajurbe ne ek hee baat sikhaee hai ,
naya dard hee puraane dard kee davaii hai . 

मैं ने अपनी ख़ुश्क आँखों से लहू छलका दिया ,
इक समुंदर कह रहा था मुझ को पानी चाहिए। 


rahat indori sher


रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं,
रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है। 

जुबां तो खोल, नजर तो मिला, जवाब तो दे,
मैं कितनी बार लुटा हूँ, हिसाब तो दे। 

फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो,
इश्क़ खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो। 

आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो,
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो। 

na main kaabil e taareef hoon, na kaabil e tahaseen,
ek sulajha hua insaan hoon, ulajhe mijaaj ka.

गुलाब, ख्वाब, दवा, ज़हर, जाम क्या क्या हैं,
 में आ गया हु बता इंतज़ाम क्या क्या हैं ,
फ़क़ीर, शाह, कलंदर, इमाम क्या क्या हैं,
 तुझे पता नहीं तेरा गुलाम क्या क्या हैं। 

मैंने अपनी खुश्क आँखों से लहू छलका दिया,
इक समंदर कह रहा था मुझको पानी चाहिए।

बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए,
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए। 

ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था,
मैं बच भी जाता तो एक रोज मरने वाला था। 


rahat indori poetry


उस आदमी को बस इक धुन सवार रहती है,
बहुत हसीन है दुनिया इसे ख़राब करूं। 

kuchh gunaah to tere bhee honge,
tabhee khuda ne mujhe tujhase juda kar diya. 

ख़याल था कि ये पथराव रोक दें चल कर जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे। 

बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर,
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ। 

मैं आखिर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता,
यहां हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी है। 

अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए,
कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए। 

मैं आ कर दुश्मनों में बस गया हूँ यहाँ हमदर्द हैं दो-चार मेरे,

नए किरदार आते जा रहे हैं,
मगर नाटक पुराना चल रहा है। 

माँ के क़दमों के निशां हैं कि दिए रौशन हैं,
ग़ौर से देख यहीं पर कहीं जन्नत होगी। 


rahat indori ki shayari


रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है,
चाँद पागल है अंन्धेरे में निकल पड़ता है। 

किसने दस्तक दी, दिल पे, ये कौन है,
आप तो अन्दर हैं, बाहर कौन है। 

सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें ,
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें ,
शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं ,
हम आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें। 

रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है,
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है। 

तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो,
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो। 

ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था,
मैं बच भी जाता तो एक रोज मरने वाला था। 

हर एक हर्फ़ का अंदाज़ बदल रखा हैं ,
आज से हमने तेरा नाम ग़ज़ल रखा हैं ,
मैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दिया ,
मेरे कमरे में भी एक “ताजमहल” रखा हैं। 

बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए,
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए। 

मुझसे पहले वो किसी और की थी, मगर कुछ शायराना चाहिये था,
चलो माना ये छोटी बात है, पर तुम्हें सब कुछ बताना चाहिये था। 


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मेरा नसीब, मेरे हाथ कट गए वरना,
मैं तेरी माँग में सिन्दूर भरने वाला था। 

कभी महक की तरह हम गुलों से उड़ते हैं,
कभी धुएं की तरह पर्वतों से उड़ते हैं। 

आखिर में उनका ये शेर,
कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया,
इस पार के थपेड़ों ने उस पार कर दिया,
साहब अफवाह थी कि मेरी तबीयत खराब है,
लोगों ने पूछ-पूछकर बीमार कर दिया,
दो गज सही मगर ये मेरी मिल्कियत तो है,
ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया। 

सरहदों पर बहोत तनाव है क्या,
कुछ पता तो करो चुनाव है क्या। 

जंग है तो जंग का मंज़र भी होना चाहिए,
सिर्फ नेज़े हाथ में हैं सर भी होना चाहिए। 

jo taur hai duniya ka usi taur se bolo,
bahron ka ilaqa hai zara zor se bolo. 

रोज़ तारों को नुमाइश में खलल पड़ता हैं,
चाँद पागल हैं अन्धेरें में निकल पड़ता है,
उसकी याद आई हैं सांसों, जरा धीरे चलो,
धडकनों से भी इबादत में खलल पड़ता हैं। 

जवानिओं में जवानी को धुल करते हैं,
जो लोग भूल नहीं करते, भूल करते हैं,
अगर अनारकली हैं सबब बगावत का,
सलीम हम तेरी शर्ते कबूल करते हैं। 

हाथ ख़ाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,
जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते,
अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,
उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते जाते।


rahat indori sad shayari


बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए,
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए। 

मैं आखिर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता,
यहां हर एक मौसम को गुज़र जाने की जल्दी है। 

माँ के क़दमों के निशां हैं कि दिए रौशन हैं,
ग़ौर से देख यहीं पर कहीं जन्नत होगी। 

Dosti jab kisi se ki jaye,
Dushmanon ki bhi raye li jaye. 

मुझसे पहले वो किसी और की थी, मगर कुछ शायराना चाहिये था,
चलो माना ये छोटी बात है, पर तुम्हें सब कुछ बताना चाहिये था। 

बहुत गुरूर है दरिया को अपने होने पर,
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ।

कॉलेज के सब बच्चे चुप हैं काग़ज़ की इक नाव लिए,
चारों तरफ़ दरिया की सूरत फैली हुई बेकारी है। 

ये केचियाँ हमें उड़ने से खाक रोकेंगी,
 की हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं। 

कभी अकेले में मिलकर झंझोड़ दूंगा उसे,
जहां-जहां से टूटा है जोड़ दूंगा उसे,
मुझे वो छोड़ गया ये कमाल है उसका,
इरादा मैंने किया था कि छोड़ दूंगा उसे,
पसीने बांटता फिरता है हर तरफ सूरज,
कभी जो हाथ लगा तो निचोड़ दूंगा उसे। 

फूंक डालुंगा मैं किसी रोज दिल की दुनिया,
ये तेरा खत तो नहीं है जो जला ना सकूं। 



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